1. ‘ओ सदानीरा’ शीर्षक निबंध में वर्णित मन कैसे ताल हैं?
(A) गहरे
(B) छोटे और विशाल
(C) उथले और छिछले
(D) गहरे और विशाल
उतर=D
2. ‘ओ सदानीरा’ किस विधा के अन्तर्गत है?
(A) नाटक
(B) निबंध
(C) आत्मकथा
(D) कहानी
उतर=B
3. ‘बहुजन सम्प्रेषण के माध्यम’ पुस्तक किसने लिखी है?
(A) जयप्रकाश नारायण
(B) जगदीश चंद्र माथुर
(C) मलयज
(D) मोहन राकेश
उतर=B
4. इनमें से कौन-सी रचना जगदीश चन्द्र माथुर की है?
(A) बातचीत
(B) ओ सदानीरा
(C) तिरिछ
(D) हँसते हुए मेरा अकेलापन
उतर=B
5. ‘ओ सदानीरा’ शीर्षक पाठ के लेखक कौन हैं?
(A) मोहन राकेश
(B) उदय प्रकाश
(C) जगदीश चंद्र माथुर
(D) नामवर सिंह
उतर=C
6. ‘ओ सदानीरा’ शीर्षक पाठ के अनुसार, सन् 1962 की बाढ़ का दृश्य जिन्होंने देखा है उन्हें ‘रामचरितमानस’ में किसके क्रोध रूपी नदी की बाढ़ याद आई होगी?
(A) लक्ष्मण के
(B) भरत के
(C) कैकेयी के
(D) राम के
उतर=C
‘7 ओ सदानीरा’ पाठ के अनुसार, गाँधीजी ने ‘आश्रम विद्यालय’ कहाँ स्थापित किया था?
(A) पाटलिपुत्र, नालंदा में
(B) सासाराम, भभुआ मे
(C) वैशाली, राजगीर में
(D) बड़हरवा, मधुबन और भितिहरवा में
उतर=D
8. धाँगड़ों को 18 वीं शताब्दी के अंत में किस कार्य के लिए लाया गया था?
(A) नील की खेती के लिए
(B) मखाना की खेती के लिए
(C) मक्का की खेती के लिए
(D) इनमें से कोई नहीं
उतर=A
9 गंडक नदी की चर्चा किस शीर्षक पाठ में है
(A) ओ सदानीरा
(C) अर्धनारीश्वर
(B) रोज
(D) तिरिछ
उतर=A
10. ‘तीनकठिया’ प्रथा का सम्बंध किससे है?
(A) हींग
(B) कपास
(C) नील
(D) रंग
उतर=C
11. आपस में ‘धाँगड़’ किस भाषा में बात करते थे?
(A) मिश्रित बुंदेली
(B) ब्रजबुलि
(C) मिश्रित ओराँव
(D) मणिपुरी
उतर=C
12 निम्नलिखित में से किसे कालिदास अवार्ड से सम्मानित किया गया?
(A) मोहन राकेश को
(B) जयप्रकाश नारायण को
(C) जगदीशचंद्र माथुर को
(D) बालकृष्ण भट्ट को
उतर=C
13. ‘ओ सदानीरा’ शीर्षक निबंध किस पुस्तक से उद्धृत है?
(A) मेरी बाँसुरी से
(B) बोलते क्षण से
(C) ओ मेरे सपने से
(D) कोणार्क से
उतर=B
14. चम्पारन आंदोलन में गाँधी जी के सलाहकार कौन थे
(A) परशुराम सिंह
(B) दीना पाठक
(C) हरवंस सहाय
(D) जगमल चौधरी
उतर=C
15. गोरखपुर जिले में गंडक नदी को क्या कहा जाता है?
(A) बागमती नदी
(B) कोसी नदी
(C) कमला नदी
(D) नारायणी नदी
उतर=D
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. गंगा पर पुल बनाने में अंग्रेजों ने क्यों दिलचस्पी नहीं ली?
उत्तर= चम्पारण में नीलहे गोरे किसानों का शोषण और अन्य अत्याचार करते थे। दक्षिण बिहार के बागी विचारों का असर चम्पारण में देर से पहुँचे इसलिऐ गंगा पर पुल बनाने की स्कीम में तत्कालीन शासन ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और यों बरसों तक चम्पारण में गोरे निलहों का राज ब्रिटिश साम्राज्य की छत्रछाया में पनपता रहा।
2. ‘पुंडलीक’ जी कौन थे?
उत्तर = सन् 1917 में पुंडलीक जी को गाँधीजी ने बेलगाँव से बुलाया, भितिहरवा आश्रम में रहकर बच्चों को पढ़ाने के लिए और ग्रामवासियों के दिल से भय दूर करने के लिए वे लगभग एक साल रहे और फिर अंग्रेज सरकार ने उन्हें जेल से निर्वासित कर दिया। लेकिन हर दो-तीन साल में पुराने स्थान को देखने पुंडलीक जी आ जाते थे।
पुंडलीकजी का तेजस्वी व्यक्तित्व, बलिष्ठ शरीर और दबंग आवाज साक्षी है। उस अग्निशिखा के जिसने गाँधीजी के शीतल बंधन में बंध जाना मंजूर किया। एक दिन अंग्रेज एमन साहब पुंडलीकजी के आश्रम में आया। कायदा था कि साहब जब आए तो गृहपति उसके घोड़े की लगाम पकड़े। पुंडलीकजी ने कहा- ‘नहीं उसे आना है तो मेरी कक्षा में आए, मैं लगाम पकड़ने नहीं जाऊँगा।’ एमन ही डर गया।
पुंडलीकजी ने गाँधीजी से सीखी निर्भीकता और वही निर्भीकता उन्होंने गाँव वालों को दी। चम्पारण अभियान का सबसे बड़ा वरदान यही निर्भीकता थी।
3. गाँधीजी के शिक्षा संबंधी आदर्श क्या थे?
उत्तर=गाँधीजी ने स्कूलों में नपा-तुला पाठ्यक्रम शुरू नहीं किया। वे पुरानी लीक से हटकर चलना चाहते थे। वर्तमान शिक्षा-पद्धति को वे खौफनाक और हेय मानते थे। छोटे बच्चों के चरित्र और बुद्धि का विकास करने के बजाय यह पद्धति उन्हें बौना बनाती है।
गाँधीजी का मुख्य उद्देश्य यह था कि बच्चे ऐसे पुरुष और महिलाओं के सम्पर्क में आएँ जो सुसंस्कृत हों और जिनका चरित्र निष्कलुष हो। वे इस ही शिक्षा मानते थे। अक्षर ज्ञान तो इस उद्देश्य की प्राप्ति का एक साध मात्र है।
जीविका के लिए जो बच्चे नए साधन सीखना चाहते हैं उनके लिए औद्योगिक शिक्षा की व्यवस्था करने के महात्मा गाँधी पक्षधर थे। गाँधीजी यह न चाहते थे कि शिक्षा पा लेने के बाद ये बच्चे अपने वंशगत व्यवसाय व छोड़ दें। वे कहते थे जो ज्ञान बच्चे स्कूल में प्राप्त करेंगे उसका उपय खेती और ग्रामीण जीवन को परिष्कृत करने में होगा।
4. ‘ओ सदानीरा’ किस नदी के लिए कहा गया है?
उत्तर= ओ सदानीरा’ गंडक नदी के लिए कहा गया है। पहले यह नदी लाज से सिकुड़ी रहती थी। अब वह उन्मतयौवना वीरांगनाओं की भाँति प्रचंड नर्तन करती है।
5. ‘धाँगड़’ शब्द का क्या अर्थ है?
5. उत्तर= ‘धाँगड़’ शब्द का अर्थ ओराँव भाषा में है-भाड़े का मजदूर। धाँगड़ों को 18वीं शताब्दी के अंत में चम्पारण लाया गया। ये नील की खेती करने यहाँ आए थे। ये लोग दक्षिण बिहार के छोटानागपुर पठार से लाए गए वहाँ की आदिवासी जातियों ओराँव, मुंडा, लोहार इत्यादि के वंशज हैं। इनके लोकगीतों में दो सौ वर्ष पूर्व के उस महाप्रस्थान की कथा बिखरी पड़ी है, जब नील के खेतों पर काम करने के लिए अंग्रेज साहब और रामनगर के तत्कालीन राजा इन्हें यहाँ लाए और उसके बाद बरसों तक इन्हें लगभग गुलामी का जीवन बिताना पड़ा। आपस में धाँगड़ मिश्रित ओराँव भाषा में बात करते हैं और दूसरों से ‘भोजपुरी’ या ‘मधेसी’ में।